जलवायु अनुकूल कृषि पर प्रशिक्षण कार्यशाला सम्पन्न गांव (बमबमपूर्वा परसपुर) , वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों की रही सक्रिय भागीदारी : गोण्डा

जलवायु अनुकूल कृषि पर प्रशिक्षण कार्यशाला सम्पन्न गांव (बमबमपूर्वा परसपुर) , वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों की रही सक्रिय भागीदारी : गोण्डा 



गोंडा, 28 मई -  राष्ट्रीय जलवायु समुत्थान कृषि परियोजना (राष्ट्रीय जलवायु समुत्थान कृषि में  नवप्रवर्तन  (निकरा) )के अंतर्गत  दीनदयाल शोध संस्थान लाल बहादुर शास्त्री कृषि विज्ञान केंद्र , गोंडा में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जलवायु परिवर्तन, गन्ने की उन्नत किस्में, फसल चक्र, मृदा परीक्षण और कृषि योजनाओं से संबंधित विषयों पर विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण जानकारियाँ साझा कीं। क्षेत्र के लगभग 40  किसानों ने इस आयोजन में सहभागिता की।

इस कार्यक्रम का सफल संचालन राष्ट्रीय जलवायु समुत्थान कृषि में  नवप्रवर्तन  (निकरा) परियोजना के सीनियर रिसर्च फेलो श्री राहुल शुक्ला द्वारा किया गया। उन्होंने किसानों के प्रशिक्षण को व्यवस्थित ढंग से संचालित किया और फील्ड विज़िट सहित सभी गतिविधियों का कुशल प्रबंधन किया।

डॉ. सुधांशु वैज्ञानिक (दीनदयाल शोध संस्थान लाल बहादुर शास्त्री कृषि विज्ञान केंद्र , गोंडा) ने गन्ने की उच्च उत्पादन वाली किस्मो — Co-14201, Col -16202 एवं के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि ये किस्में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को सहन करने में सक्षम हैं और अधिक उत्पादन देती हैं।

श्री संत कुमार त्रिपाठी, प्रोग्राम असिस्टेंट (दीनदयाल शोध संस्थान लाल बहादुर शास्त्री कृषि विज्ञान केंद्र , गोंडा)ने सरकारी योजनाओं जैसे प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, किसान क्रेडिट कार्ड और फसल बीमा योजना की जानकारी दी और किसानों को इनका लाभ लेने की अपील की।

डॉ. सत्यव्रत मोहंती, रिसर्च एसोसिएट (विश्वभारती विश्वविद्यालय, शांतिनिकेतन) ने जलवायु परिवर्तन और मानसून में हो रहे बदलावों का कृषि पर प्रभाव स्पष्ट किया और जलवायु अनुकूल तकनीकों को अपनाने की सलाह दी।

रुचि सिंह शोध छात्र (विश्वभारती विश्वविद्यालय, शांतिनिकेतन) ने फसल चक्र और मृदा परीक्षण की उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि मृदा परीक्षण से उचित पोषण प्रबंधन संभव हो पाता है जिससे फसल की उत्पादकता बढ़ती है।

इस कार्यशाला में प्रगतिशील किसान श्री गोविंद बहादुर और श्री दिनेश की भी सक्रिय सहभागिता रही। उन्होंने स्थानीय स्तर पर अपनाई जा रही नवाचारों और तकनीकों को अन्य किसानों के साथ साझा किया और फील्ड डेमोंस्ट्रेशन में भी सहयोग प्रदान किया।

फील्ड विज़िट का आयोजन प्रगतिशील किसान गोविंद के खेत टमाटर पर किया गया जहाँ पर किसानों को वास्तविक कृषि पद्धतियों का प्रदर्शन

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