21 करोड़ के साइबर फ्रॉड का खुलासा: पूर्व भाजपा ओबीसी मोर्चा नगर मंत्री समेत 5 गिरफ्तार, 3.20 करोड़ रुपए फ्रीज

21 करोड़ के साइबर फ्रॉड का खुलासा: पूर्व भाजपा ओबीसी मोर्चा नगर मंत्री समेत 5 गिरफ्तार, 3.20 करोड़ रुपए फ्रीज : गोण्डा 




गोंडा :  पुलिस और साइबर सेल ने रविवार को अंतरराज्यीय साइबर ठगी का खुलासा किया है। जिसमें पूर्व भाजपा ओबीसी मोर्चा नगर मंत्री विजय सोनी समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में अब तक 20 से अधिक खातों से 21 करोड़ रुपए से ज्यादा के लेनदेन हुआ है।

आरोपी बेरोजगार युवकों को सोलर कंपनी में नौकरी और सैलरी अकाउंट खुलवाते थे। इन्हीं खातों को 'म्यूल अकाउंट' बनाकर देशभर में निवेश ठगी, डिजिटल अरेस्ट और सेक्सटॉर्शन जैसे साइबर अपराधों से हासिल करोड़ों रुपए ट्रांसफर किए जाते थे।

पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पूर्व भाजपा ओबीसी मोर्चा नगर मंत्री विजय सोनी, दीपक गोयल, देवनारायण मिश्रा, गंगोत्री पांडेय और शाहबान आलम उर्फ सोनू को गिरफ्तार कर लिया। इनके पास से 6 मोबाइल फोन, 15 आधार कार्ड, 10 सिम कार्ड, 8 मोहरें, दो दोपहिया वाहन और विभिन्न फर्मों के फर्जी दस्तावेज बरामद किए हैं। मामला देहात कोतवाली का है।




मामले की शुरुआत सिसई टिकरिया निवासी वीरेंद्र प्रताप और सत्यम तिवारी की शिकायत से हुई। दोनों ने देहात कोतवाली में तहरीर देकर आरोप लगाया कि उन्हें सोलर कंपनी में नौकरी और 15 हजार रुपए वेतन का लालच दिया गया।

21 फरवरी को विजय सोनी और दीपक गोयल उन्हें प्रथमा यूपी ग्रामीण बैंक की बड़गांव शाखा ले गए, जहां सैलरी अकाउंट खोलने की बात कही गई। लेकिन बैंक कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से उनके नाम पर श्री श्याम इंटरप्राइजेज के नाम से करंट अकाउंट खोल दिया गया।

पीड़ितों का आरोप है कि खाते में अपना मोबाइल नंबर लिंक कर आरोपियों ने नेट बैंकिंग का पूरा नियंत्रण अपने पास रख लिया। 21 फरवरी से 6 मार्च के बीच इन्हीं खातों से आरटीजीएस के जरिए करीब ढाई करोड़ रुपए विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर दिए गए। बाद में बैंक पहुंचने पर उन्हें पूरे फर्जीवाड़े की जानकारी हुई।
फर्जी दस्तावेज तैयार कर बनाते थे म्यूल अकाउंट

पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह पहले बेरोजगार और जरूरतमंद लोगों को नौकरी का झांसा देता था। इसके बाद उन्हें सोनू मोबाइल एंड कंप्यूटर कैफे ले जाकर फर्जी उद्यम पंजीकरण, जीएसटी रजिस्ट्रेशन और अन्य दस्तावेज तैयार कराए जाते थे। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर अलग-अलग बैंकों में करंट अकाउंट खुलवाए जाते थे। कई मामलों में बैंक ऑफ बड़ौदा समेत अन्य बैंकों में भी फर्जी फर्मों के नाम पर खाते खोले गए।

आरोपी खाताधारकों को यह विश्वास दिलाते थे कि यह उनका सैलरी अकाउंट है, जबकि खाते का पूरा एक्सेस अपने मोबाइल नंबर और नेट बैंकिंग के जरिए खुद संचालित करते थे। बाद में इन्हीं खातों का इस्तेमाल साइबर अपराध से प्राप्त रकम को एक जगह से दूसरी जगह भेजने के लिए 'म्यूल अकाउंट' के रूप में किया जाता था।

पुलिस के अनुसार दस्तावेजों से अब तक 20 से अधिक म्यूल खातों का पता चला है। इन खातों से 21 करोड़ रुपए से अधिक का लेनदेन किया गया। एनसीआरपी पोर्टल पर इन खातों के खिलाफ उत्तर प्रदेश, हरियाणा, तमिलनाडु, लद्दाख, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, कर्नाटक और तेलंगाना सहित कई राज्यों से 43 शिकायतें दर्ज हैं। पुलिस अब तक 3.20 करोड़ रुपए फ्रीज करा चुकी है।

डिजिटल अरेस्ट और सेक्सटॉर्शन में इस्तेमाल होते थे खाते

पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि गिरोह इन खातों का इस्तेमाल निवेश के नाम पर ठगी, डिजिटल अरेस्ट, सेक्सटॉर्शन और अन्य साइबर अपराधों से वसूली गई रकम को ट्रांसफर करने के लिए करता था। इसके बदले आरोपी मोटा कमीशन लेते थे। प्रारंभिक जांच में कई राज्यों से जुड़े साइबर अपराधियों के साथ इनके संपर्क के भी संकेत मिले हैं।

एसपी बोले- नेटवर्क की जांच अभी जारी

एसपी विनीत जायसवाल ने बताया कि आरोपियों ने भोले-भाले लोगों को सोलर कंपनी में नौकरी और सैलरी अकाउंट का झांसा देकर उनके नाम पर करंट अकाउंट खुलवाए। इसके बाद में इन खातों का एक्सेस लेकर साइबर अपराध से अर्जित धन का लेनदेन किया जाता था। पुलिस इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भी गिरफ्तारी हो सकती है।




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