मिलिए वायुसेना के जांबाजों से जो फ्रांस से स्वदेश लाए राफेल
इन पायलटों का भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने स्वागत किया. इन पांच राफेल ने दक्षिणी फ्रांस के मेरीग्नेक से भारत के लिए उड़ान भरी और बीच में एक स्टॉपओवर लेने के बाद अम्बाला पहुंचे.
●5 राफेल ने फ्रांस के मेरीग्नेक से भारत के लिए भरी थी उड़ान
●पायलटों के दल का नेतृत्व ग्रुप कैप्टन हरकीरत सिंह ने किया
अंबाला में भारतीय वायुसेना का एयरबेस उन सुनहरे पलों का गवाह बना जब पांच राफेल लड़ाकू विमानों ने भारतीय जमीन को छुआ. वायुसेना के 7 जांबाज़ पायलट इन विमानों को फ्रांस से 7,000 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद यहां लाए.
इन पायलटों का भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने स्वागत किया. इन पांच राफेल ने दक्षिणी फ्रांस के मेरीग्नेक से भारत के लिए उड़ान भरी और बीच में एक स्टॉपओवर लेने के बाद यहां पहुंचे.ग्रुप कैप्टन हरकीरत सिंह पायलटों के दल का नेतृत्व ग्रुप कैप्टन हरकीरत सिंह ने किया. वे 17 स्क्वॉड्रन के कमांडिंग ऑफिसर हैं जिसे गोल्डन एरोज के नाम से भी जाना जाता है. ये स्क्वॉड्रन अंबाला एयरबेस पर तैनात हैं और पश्चिमी कमांड का हिस्सा है. ग्रुप कैप्टन सिंह को 2008 में शौर्य चक्र से नवाजा गया. वे मिग 21 बाइसन की उड़ान पर थे जब उन्हें आपातकालीन स्थिति का सामना करना पड़ा. उन्होंने न सिर्फ अपने एयरक्राफ्ट को बचाया बल्कि ये सुनिश्चित किया कि किसी जान का नुकसान न हो. 2001 में वायुसेना में कमीशन लेने वाले ग्रुप कैप्टन सिंह नई राफेल स्क्वाड्रन के पहले कमांडिंग ऑफिसर हैं.
ग्रुप कैप्टन सिंह के पिता भी सेना में रहे और लेफ्टिनेंट कर्नल की पोस्ट पर रिटायर हुए. उनकी पत्नी भी वायुसेना में सर्विंग ऑफिसर हैं.विंग कमांडर अभिषेक त्रिपाठी विंग कमांडर अभिषेक त्रिपाठी राजस्थान के छोटे शहर जालौर से हैं. विंग कंमाडर त्रिपाठी को लेकर उनके गांव के लोगों का सीना गर्व से चौड़ा है. उनके दोस्त बताते हैं कि वे बचपन में दौड़ने और कुश्ती में भी दांव आजमाने के शौकीन रहे हैं.9 जनवरी 1984 को जन्मे विंग कमांडर त्रिपाठी के पिता बैंक में कार्यरत रहे और उनकी मां ने सेल्स टैक्स डिपार्टमेंट में काम किया.
विंग कमांडर मनीष सिंह विंग कमांडर मनीष सिंह उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के छोटे से गांव बकवा से ताल्लुक रखते हैं. उनके कई रिश्तेदारों ने सेना में सेवाएं दीं. इसी परम्परा को जारी रखते हुए उन्होंने सैनिक स्कूल में दाखिला लिया और फिर नेशनल डिफेंस एकेडमी पहुंचे. उन्हें भारतीय वायुसेना में 2003 में कमीशन मिला.उन्हें राफेल की ट्रेनिंग के लिए फ्रांस भेजे जाने और उनके फ्रांस से विमान को स्वदेश लाने को लेकर पूरे गांव में उत्साह का माहौल है. विंग कमांडर मनीष सिंह की मां का कहना है कि हर कोई उनके बेटे को लेकर गर्व कर रहा है.ग्रुप कैप्टन रोहित कटारिया ग्रुप कैप्टन रोहित कटारिया भी उन पायलट्स के बैच में शामिल हैं जो राफेल को फ्रांस से भारत लेकर आए. वे हरियाणा के गुरुग्राम के बसई गांव से नाता रखते हैं. उनके पिता भी सेना में अधिकारी रहे हैं. कर्नल के पद से रिटायर होने के बाद ग्रुप कैप्टन कटारिया के पिता सैनिक स्कूल के प्रिंसिपल रहे. ग्रुप कैप्टन कटारिया की उपलब्धियो को सुनकर उनके गांव में युवकों में जोश देखते ही बनता है. ये युवक पायलट को अपना रोल मॉडल बताते हैं.
राफेल के आगमन ने भारतीय वायुसेना की युद्ध क्षमताओं में नये युग की शुरुआत की. साथ ही वायुसेना से जुड़ने के लिए युवाशक्ति को प्रेरित भी करेंगे. ये हीरो दूसरे पायलटों को भी ट्रेनिंग देने में अहम भूमिका निभाएंगे. और ये गौरवगाथा इसी तरह आगे बढ़ती जाएगी.राफेल की कीर्ति से जुड़े ये कुछ चेहरे हैं. लेकिन पर्दे के पीछे भी कई और हैं जो भारत की वायुसेना की इस नई ताकत को जल्दी से जल्दी एक्शन में लाने में दिन-रात जुटे हैं.
Team Gonda Jagran Daily News
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