बाल द्वारा होमीओपैथिक चिकित्सा पद्धति से काम करने वाले चिकित्सकों के लिए कोरोना आपदा में अवसर साबित हुआ और मानवता की सेवा का नया आयाम बना : डा० रवि सिंह
डाक्टर रवि सिंह
गोण्डा :- डाक्टर रवि सिंह ने कहा कि कोरोना महामारी में सरकार ने सम्पूर्ण लाकडाउन का निर्णय लिया ,जिससे काफी हदतक पॉजिटिव मरीजो की संख्या कुछ हदतक कन्ट्रोल मे रही ,लेकिन दुसरी तरफ सामान्य मरीज़ों को बहुत परेशानी हुई।रोगी डॉक्टर को दिखाना चाह रहे थे ,और डॉक्टर रोगी को देखना चाह रहे थे , लेकिन कुछ सरकारी नियमों, और कोरोना वायरस के डर व कुछ परिवहन की असुविधाओं के नाते चिकित्सक और रोगी दोनों मजबूर थे।बहुत सारे चिकित्सकों को आर्थिक नुक़सान भी हुआ
यहाँ डॉक्टर बन्धु की साहनी की की गयी खोज चिकित्सा विज्ञान में रोगी और चिकित्सक दोनों के लिए वरदान साबित हो रही थी
डा०रवि सिंह अपने किसी रोगी में कोई खाने या लगाने की दवा नहीं देते है ,चुनी हुई दवा में रोगी का बाल लगाकर दूर बैठे मरीजो की चिकित्सा की जा सकती है।
उन्होंने बताया कि रोगी ने मुझे कानपुर से फ़ोन द्वारा सम्पर्क किया यह एक बीमारी जिसे काईलूरिया कहते हैं उससे प्रभावित था
इस रोग में रोगी की दूध जैसे रंग की पेशाब होती है।
शरीर में लिया फ़ैट या वसा सीधे मूत्र मार्ग से बाहर आ जाता है
ये इसका ऑपरेशन भी कर चुके थे जिसमें दूरबीन विधि से गुर्दे में बीटाडीन या सिल्वर नाइट्रेट डाला जाता है लेकिन इनकी समस्या में सुधार नहीं हो रहा था
ये मेरे लखनऊ की क्लिनिक में आना चाहते थे लेकिन कुछ डर वश और कुछ साधन के अभाव में आ नहीं पा रहे थे ,मैंने उन्हें डाक द्वारा बाल भेजने की सलाह दी,भारतीय डाक के आभार स्वरूप हमें उनका बाल मिला और २ जून को हमने इनका बाल calcarea carb ०/१ नाम की औषधि में लगाया
इन्हें एक सप्ताह में ही न केवल इनकी काईलूरिया समस्या में आराम मिला बल्कि इन्हें पेट की समस्या में लाभ मिला
आज 23/06/2020 को इनका विडीओ काल द्वारा हाल लिया गया ।
तो ऐसे स्थिति मे डाक्टर रवि सिंह की चिकित्सा प्रणाली काफी हदतक मरीजो के रोग का निदान कराने में सक्षम है, आपको जानकारी के लिए बता दे कि इसमे मरीज दुनिया के किसी मे शहर मे हो ,बस उसके बाल से उस मरीज का ईलाज करना संभव हो जाता है उसके बाल में दवा दी जाती है और उस दवा का असर जहा पर मरीज होता है उसे लाभ पहुचाती है और उसके रोगो का निदान होता है।
रिपोर्टर :- आकाश कुमार सोनी
डाक्टर रवि सिंह
गोण्डा :- डाक्टर रवि सिंह ने कहा कि कोरोना महामारी में सरकार ने सम्पूर्ण लाकडाउन का निर्णय लिया ,जिससे काफी हदतक पॉजिटिव मरीजो की संख्या कुछ हदतक कन्ट्रोल मे रही ,लेकिन दुसरी तरफ सामान्य मरीज़ों को बहुत परेशानी हुई।रोगी डॉक्टर को दिखाना चाह रहे थे ,और डॉक्टर रोगी को देखना चाह रहे थे , लेकिन कुछ सरकारी नियमों, और कोरोना वायरस के डर व कुछ परिवहन की असुविधाओं के नाते चिकित्सक और रोगी दोनों मजबूर थे।बहुत सारे चिकित्सकों को आर्थिक नुक़सान भी हुआ
यहाँ डॉक्टर बन्धु की साहनी की की गयी खोज चिकित्सा विज्ञान में रोगी और चिकित्सक दोनों के लिए वरदान साबित हो रही थी
डा०रवि सिंह अपने किसी रोगी में कोई खाने या लगाने की दवा नहीं देते है ,चुनी हुई दवा में रोगी का बाल लगाकर दूर बैठे मरीजो की चिकित्सा की जा सकती है।
उन्होंने बताया कि रोगी ने मुझे कानपुर से फ़ोन द्वारा सम्पर्क किया यह एक बीमारी जिसे काईलूरिया कहते हैं उससे प्रभावित था
इस रोग में रोगी की दूध जैसे रंग की पेशाब होती है।
शरीर में लिया फ़ैट या वसा सीधे मूत्र मार्ग से बाहर आ जाता है
ये इसका ऑपरेशन भी कर चुके थे जिसमें दूरबीन विधि से गुर्दे में बीटाडीन या सिल्वर नाइट्रेट डाला जाता है लेकिन इनकी समस्या में सुधार नहीं हो रहा था
ये मेरे लखनऊ की क्लिनिक में आना चाहते थे लेकिन कुछ डर वश और कुछ साधन के अभाव में आ नहीं पा रहे थे ,मैंने उन्हें डाक द्वारा बाल भेजने की सलाह दी,भारतीय डाक के आभार स्वरूप हमें उनका बाल मिला और २ जून को हमने इनका बाल calcarea carb ०/१ नाम की औषधि में लगाया
इन्हें एक सप्ताह में ही न केवल इनकी काईलूरिया समस्या में आराम मिला बल्कि इन्हें पेट की समस्या में लाभ मिला
आज 23/06/2020 को इनका विडीओ काल द्वारा हाल लिया गया ।
तो ऐसे स्थिति मे डाक्टर रवि सिंह की चिकित्सा प्रणाली काफी हदतक मरीजो के रोग का निदान कराने में सक्षम है, आपको जानकारी के लिए बता दे कि इसमे मरीज दुनिया के किसी मे शहर मे हो ,बस उसके बाल से उस मरीज का ईलाज करना संभव हो जाता है उसके बाल में दवा दी जाती है और उस दवा का असर जहा पर मरीज होता है उसे लाभ पहुचाती है और उसके रोगो का निदान होता है।
रिपोर्टर :- आकाश कुमार सोनी

