बाबू ईश्वर शरण जिला चिकित्सालय ,गोण्डा में परसपुर से आए मरीज का इलाज नही किया गया और बिना वजह बताये रेफेर कर दिया गया
टीम गोंडा जागरण Daily News-
गोण्डा :- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार 28 जून को गोण्डा कोविड-19 हॉस्पिटल का निरीक्षण करने आये थे, उनके गोण्डा पहुचने से कुछ ही समय पहले समय करीब 12:30 pm पर गोण्डा डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल के डॉक्टरों व कर्मचारियों की लापरवाही का वीडियो सामने आया है जिसमे एक रिटायर्ड राजस्व कर्मचारी नरेंद्र किशोर चैबे निवासी- ग्राम नये पुरवा,पोस्ट- सरैया
तहसील-कर्नलगंज, थाना- परसपुर है।
जिला चिकित्सालय में कोई भी इलाज नही किया गया और बिना वजह बताये रेफेर कर दिया गया।उनके पुत्र दिनेश कुमार चौबे ने बताया की इमरजेंसी में बैठे डॉक्टर ने एक कोई दर्द का इंजेक्शन लगाया, ना ही डॉक्टर ने डायग्नोसिस किया और न ही कुछ पूछा और परिजनों से कहा कि आप इन्हें लखनऊ ले कर जाइये,
नियम तो ये है कि अगर किसी सरकारी अस्पताल से मरीज़ को किसी अन्य सरकारी अस्पताल रेफर किया जाता है तो एम्बुलेंस सुविधा दी जाती है,पर उन्हें साफ मना कर दिया गया और दिनेश जी का कहना है ना ही उपचार किया गया है, और न ही कुछ बताया जा रहा है।
आखिर थक हार कर दिनेश जी ने अपने पिता श्री नरेन्द्र चौबे को प्राइवेट वाहन से kgmc के लिए निकल गए।
यह कृत्य निंदनिय है। और गरीबो पर इस तरह से हो रहे मानशिक व आर्थिक प्रताड़ना को तत्काल बन्द करना चाहिए।
संवाददाता:- आकाश कुमार सोनी
टीम गोंडा जागरण Daily News-
गोण्डा :- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार 28 जून को गोण्डा कोविड-19 हॉस्पिटल का निरीक्षण करने आये थे, उनके गोण्डा पहुचने से कुछ ही समय पहले समय करीब 12:30 pm पर गोण्डा डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल के डॉक्टरों व कर्मचारियों की लापरवाही का वीडियो सामने आया है जिसमे एक रिटायर्ड राजस्व कर्मचारी नरेंद्र किशोर चैबे निवासी- ग्राम नये पुरवा,पोस्ट- सरैया
तहसील-कर्नलगंज, थाना- परसपुर है।
जिला चिकित्सालय में कोई भी इलाज नही किया गया और बिना वजह बताये रेफेर कर दिया गया।उनके पुत्र दिनेश कुमार चौबे ने बताया की इमरजेंसी में बैठे डॉक्टर ने एक कोई दर्द का इंजेक्शन लगाया, ना ही डॉक्टर ने डायग्नोसिस किया और न ही कुछ पूछा और परिजनों से कहा कि आप इन्हें लखनऊ ले कर जाइये,
नियम तो ये है कि अगर किसी सरकारी अस्पताल से मरीज़ को किसी अन्य सरकारी अस्पताल रेफर किया जाता है तो एम्बुलेंस सुविधा दी जाती है,पर उन्हें साफ मना कर दिया गया और दिनेश जी का कहना है ना ही उपचार किया गया है, और न ही कुछ बताया जा रहा है।
आखिर थक हार कर दिनेश जी ने अपने पिता श्री नरेन्द्र चौबे को प्राइवेट वाहन से kgmc के लिए निकल गए।
यह कृत्य निंदनिय है। और गरीबो पर इस तरह से हो रहे मानशिक व आर्थिक प्रताड़ना को तत्काल बन्द करना चाहिए।
संवाददाता:- आकाश कुमार सोनी
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